हमारे यहाँ प्राचीन संहिताओं के अनुसार निम्नलिखित शोधन प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं:
यह कफ दोष के शुद्धिकरण के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसके द्वारा फेफड़ों और आमाशय में जमा अतिरिक्त बलगम और टॉक्सिंस को बाहर निकाला जाता है। श्वसन तंत्र (Asthma) और त्वचा रोगों में बेहद प्रभावी।
पित्त दोष को संतुलित करने की मुख्य प्रक्रिया। यह लिवर, पित्ताशय और आंतों को पूरी तरह साफ करती है। **सफेद दाग (Vitiligo)**, सोरायसिस, पुरानी एसिडिटी और क्रॉनिक स्किन एलर्जी के मरीजों के लिए यह रामबाण है।
वात दोष को नियंत्रित करने का सबसे शक्तिशाली तरीका। विशेष औषधीय तेलों और काढ़ों (Decoctions) को बड़ी आंत में प्रवेश कराया जाता है। यह गठिया (Arthritis), साइटिका और पुरानी कब्ज को जड़ से खत्म करता है।
नाक के माध्यम से औषधीय तेल की बूंदें दी जाती हैं। आयुर्वेद में नाक को मस्तिष्क का द्वार माना गया है। यह माइग्रेन, साइनस, समय से पहले बालों का झड़ना और मानसिक तनाव (Stress) को दूर करने में सहायक है।
दूषित रक्त (Impure Blood) को बाहर निकालने की एक प्राचीन विधा, जिसमें अक्सर लीच थेरेपी (Jalauka) का प्रयोग किया जाता है। यह त्वचा के गहरे इन्फेक्शन, एक्जिमा और गंभीर रक्त विकारों को तुरंत शांत करता है।
जैसे समय-समय पर कार की सर्विसिंग और फिल्टर बदलना ज़रूरी है, ठीक वैसे ही हमारे शरीर को भी गहरी अंदरूनी सफाई की ज़रूरत होती है। गलत खान-पान, प्रदूषण और मानसिक तनाव से शरीर में **'आम' (Toxins)** जमा हो जाते हैं, जो आगे चलकर बड़ी बीमारियों का रूप लेते हैं। पंचकर्म इन टॉक्सिंस को ढीला करके शरीर से स्थायी रूप से बाहर निकाल देता है।
पंचकर्म के साथ-साथ हमारी क्लिनिक में **शिरोधारा** की विशेष व्यवस्था है। इसमें माथे पर (Third Eye Area) एक निरंतर धार के रूप में गुनगुना औषधीय तेल या छाछ गिराया जाता है।
वैद्य जी से परामर्श के बाद आपके शरीर के अनुसार कस्टमाइज्ड पंचकर्म प्लान तैयार किया जाएगा।