नाड़ी की गति के आधार पर वैद्य जी आपके शरीर की वर्तमान प्रकृति का सटीक विश्लेषण करते हैं:
नाड़ी की गति सर्प (Snake) जैसी टेढ़ी-मेढ़ी होती है। इसके असंतुलन से जोड़ों का दर्द, गैस, और नर्वस सिस्टम की बीमारियां होती हैं।
नाड़ी की गति मेंढक (Frog) जैसी उछलती हुई होती है। इसके बिगड़ने से लिवर की समस्या, एसिडिटी और सफेद दाग (Vitiligo) जैसे चर्म रोग होते हैं।
नाड़ी की गति हंस (Swan) जैसी धीमी और स्थिर होती है। इसके असंतुलन से मोटापा, सुस्ती, अस्थमा और धीमा मेटाबॉलिज्म होता है।
जब आप वैद्य एस.पी. सिन्हा क्लिनिक में आते हैं, तो आपकी जांच इन चरणों में होती है:
वैद्य जी आपकी कलाई के रेडियल आर्टरी पर तर्जनी (Index), मध्यमा (Middle) और अनामिका (Ring) उंगलियां रखकर नाड़ी की धड़कन महसूस करते हैं।
नाड़ी की गहराई, गति और तापमान को मापकर यह पता लगाया जाता है कि बीमारी किस अंग (Organ) से शुरू हुई है और शरीर में टॉक्सिंस कितने गहरे हैं।
जांच के तुरंत बाद, बिना किसी देरी के आपको शुद्ध जड़ी-बूटियों की दवाएं और आपकी प्रकृति के अनुकूल कस्टमाइज्ड डाइट चार्ट सौंप दिया जाता है।
सटीक और 100% सही रिपोर्ट के लिए मरीजों को इन बातों का पालन करना अनिवार्य है:
Modern reports only tell you what has already gone wrong in the body. लेकिन आयुर्वेद की नाड़ी परीक्षा यह बता सकती है कि आने वाले समय में आपके शरीर में कौन सा रोग पनपने वाला है। वैद्य एस.पी. सिन्हा के पास 35 से अधिक वर्षों का प्रामाणिक अनुभव है, जिसने हजारों असाध्य मरीजों को नया जीवन दिया है।
हमारा उद्देश्य केवल बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि दोबारा उस रोग को आपके शरीर में लौटने से रोकना है।
कृपया नीचे दिए गए फॉर्म में अपनी जानकारी भरें, हमारी टीम पुष्टि के लिए आपसे संपर्क करेगी।